नंदू की परीक्षाएं best Motivational story in Hindi for kids [motivblog]

Hindi kahani- नंदू की परीक्षाएं 

best Motivational and inspirational story in Hindi for kids.


परीक्षाएं करीब आईं तो नंदू को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह कैसे तैयारी करे? इस चिंता में वह किसी भी विषय की पढ़ाई एकाग्र होकर नहीं कर पा रहा था। मां ने जब नंदू को इस हाल में देखा तो उन्होंने उसे सही ढंग से पढ़ाई करने के लिए कुछ जरूरी बातें बताई।

क्या मां की ये बातें नंदू के कुछ काम आईं, उसकी चिंता दूर हुई? नंदू अपने इर्द-गिर्द किताबों को फैलाए उनमें खोया हुआ था।उसके सामने विज्ञान,गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी की किताबें बिखरी हुई थीं। 

कभी वह अपनी डेट-शीट को देखता तो कभी अपनी कॉपियों को कुछ देर वह विज्ञान की किताब खोलकर अणु-परमाणु की परिभाषा याद करने लगता तो गणित की किताब पर नजर मारते ही उसके सवालों को देखकर चिंतित हो जाता। 

तभी उसे ध्यान आता कि हिंदी में तो उसने कई पाठों को ढंग से पढ़ा भी नहीं है। यह ध्यान करते ही उसके हाथ-पांव फूलने लगते। फिर एक झटके में वह गुस्से में किताबों को इधर-उधर कर ठोड़ी पर हाथ रखकर प्रश्नवाचक मुद्रा में बैठ जाता।

नंदू की मां उसे कई बार खाना खाने के के लिए बुलाने आईं किंतु हर बार वह झंझलाकर कहता, 'आ रहा हूँ  न..। 'नंदू जब बहुत देर बाद भी नहीं आया तो मां ने उसे
प्यार से समझाया, 'बेटा, परीक्षाओं में काफी दिन बाकी हैं। 

अगर 'अभी से तुम्हारे हाथ-पांव इस तरह फूलने लगेंगे तो आगे परीक्षाएं कैसे दोगे?  मां की बात सुनकर नंदू रुंआसा होकर बोला, 'मां, मुझे लगता है कि इस बार अच्छे नंबरों से पास नहीं हो पाऊंगा।'नंदू के ऐसा बोलने पर मां बोलीं,  'नहीं बेटे, ऐसा नहीं कहते। 

तुम जरूर अच्छे अंक लाओगे और अगर थोड़े कम अंक आ भी गए तो कोई बात नहीं।'अपनी मां के मुख से ऐसा सुनकर नंदू हैरानी से उनकी ओर देखने लगा फिर मां


के कंधे पर सिर रखकर बोला, 'अगर मेरे कम अंक आए तो आप और पापा पक्का, मझे कुछ नहीं कहेंगे?' मां नंदू के सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, 'हां बेटा, प्रॉमिस कुछ नहीं कहेंगे। मां का जवाब सुनकर मानो नंदू की ' टेंशन दूर हो गई, वह सामान्य हो गया। 

मां भी जानती थीं कि बच्चे दबाव के कारण अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। परीक्षा के मैं  समय उन्हें समझ ही नहीं आता कि वह कैसे और क्या पढ़ें? नंदू की परेशानी जान कर अगले दिन से मां ने नंदू को परीक्षा की तैयारी करवाने में मदद की सोची। 

अगले दिन जब नंदू फिर से किताबों का ढेर लगाकर बैठा तो मां उसके पास आकर बोलीं, 'बेटा, क्या तुम इतनी सारी किताबें एक साथ पढ़ोगे?'

मां का प्रश्न सुनकर नंदू सकपका गया, बोला, 'नहीं मां, एक साथ इतनी सारी किताबें कोई कैसे पढ़ सकता है? वो तो मैंने इन्हें इकट्ठा इसलिए रखा हुआ है कि जब मुझे गणित या विज्ञान में बोरियत महसूस होने लगती है तो मैं तुरंत दूसरा विषय पढ़ना शुरू कर देता हूं। 

इससे मुझे बोरियत नहीं होती और मैं ज्यादा पढ़ पाता हूं। मां, मैं आपका कितना समझदार बेटा हूं न।' नंदू की मासूमियत पर मां बोलीं, 'हूं... पर तुम इससे भी ज्यादा समझदार हो सकते हो, अगर थोड़ा टाइम मैनेजमैंट सीख लो।' 

'टाइम मैनेजमैंट! कैसे? मुझे जल्दी बताइए न।' नंदू की उत्सुकता देख मां ने एक प्लेन पेपर पर टाइम टेबल का खाका खींचा और उसमें उसके सारे विषयों को लिखकर उनमें समय डाल दिया। 

जैसे कि अंग्रेजी सुबह छह बजे से सात बजे तक पढ़नी है और गणित शाम को पांच से छह। टाइम टेबल बनाने के बाद मां बोलीं, 'देखो बेटा, किसी भी विषय को हौव्वा मत समझो। 

पढ़ाई हम इसलिए करते हैं ताकि उसके माध्यम से हमारी समझ बढ़े और उन्हें सीख कर हम आगे बढ़ें। रट्ट तोता बनने से पढ़ाई कभी भी समझ में नहीं आती।

मां की सभी बातों को नंदू बड़े ध्यान से सुन रहा था। उसने उसी दिन से अपनी मा के बताए अनुसार पढ़ाई करनी शुरू कर दिया। एक सप्ताह बाद ही वह यह
देखकर हैरान रह गया कि सुनियोजित ढंग और एकाग्रता से पढ़ाई करने से उसे कठिन विषय भी समझ में आ गए।

मसलन, यदि तुम यह जानना चाहते हो कि टेलीविजन कैसे, कब और क्यों बना तो उसको पढ़ाई के नजरिए से न देखकर, मनोरंजन के नजरिए से देखो कि एक वैज्ञानिक ने हमारे मनोरंजन के लिए टेलीविजन बनाया। पढ़ने का यही ढंग गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी के
साथ अपनाओ। यदि तुम हिंदी और अंग्रेजी ध्यान से पढ़ रहे हो तो इसका यह अर्थ है

कि तुम अपनी दोनों भाषाओं को मजबूत बना रहे हो। यदि तुम्हारी भाषा पर पकड़ अच्छी रहेगी तो तुम अपने
आप ही इन विषयों पर विस्तार से लिख पाओगे। इससे परीक्षक भी प्रभावित होगा और तुम्हारा करियर भी संवरेगा।

'मां की सभी बातों को नंदू बड़े ध्यान से सुन रहा था। उसने उसी दिन से अपनी मां के बताए अनुसार पढ़ाई करनी शुरू कर दिया। एक सप्ताह बाद ही वह यह देखकर हैरान रह गया कि सुनियोजित ढंग और एकाग्रता से पढ़ाई करने से उसे वे विषय भी समझ में आ
गए, जो उसे कठिन लगते थे, 

जिस कारण परीक्षा का भूत उस पर सवार था, जो उसे परेशान करता था। कुछ ही दिनों बाद नंदू की परीक्षाएं शुरू हो गईं।परीक्षाओं का भूत अब उस पर सवार नहीं था बल्कि वह परीक्षाओं के समय भी हंसता-खेलता रहता था। 

यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उसकी मां ने उसे परीक्षा के भूत को भगाने का मंत्र जो दे दिया था। कुछ दिनों बाद जब परीक्षाओं का रिजल्ट आया तो इस बार नंदू बहुत- अच्छे अंकों से पास हुआ था। मां-पिता उसके रिजल्ट से बहुत खुश थे। नंदू की ई भी खुशी का कोई ठिकाना न था।


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