Hindi kids kahani- स्कूल का पहला दिन best inspirational story in Hindi for kids.


Hidni kahani- स्कूल का पहला दिन
Best inspirational story for kids and students.

best inspirational story in Hindi for kids.

आज 6 साल की नन्ही पीहू का स्कूल में पहला दिन था।पर उसके माँ के मन में तरह-तरह की आशंकाएं उमड़ घुमड़ रहे थे। क्योंकि आजकल बच्चों के साथ रोज-रोज होने वाली अपरहण आदि दुर्घटनाओं से स्मिता का मन बहुत दुखी था। कुछ अधिक ही घबराहट थी। सब काम उल्टे उल्टे हो रहे थे। आज नन्हे पीहू इन सबसे बेखबर अपना बैग और कॉपी किताबें देख कर खुश हो रही थी।तभी बाबूजी कहते हैं- "बहू" बेटा शक्कर नहीं है क्या घर में।

स्मिता कहती है - " हे तो बाबूजी"।
बाबूजी- "पर चाय में क्यों नहीं डाली ।
स्मिता -  "अरे शायद भूल गई मैं"।
बाबूजी हंसते हुए कहते है - हा हा हा हा "कोई बात नहीं।
स्मिता- "लाइए में शक्कर डालकर गर्म करके लाती हूं"।
बाबूजी- " नहीं ऊपर से ही डाल दो"।
स्मिता-   " जी लीजिए बाबूजी"।
शक्कर डालते समय भी स्मिता हाथ से कुछ शक्कर जमीन मे फैल गई थी। बुजुर्ग ससुर जी स्मिता की स्थिति समझ गए उन्होंने कुछ सोचा और मुस्कुराए फिर बोले अच्छी बात है तो... बेटा, तुम इतनी परेशान क्यों हो। "पीहू के कारण" जी बाबू जी। वह आजकल रोज टीवी और अखबार में बच्चों से जुड़ी कितनी खबरें आती है।

बाबू जी- एक बात बताओ बेटा
स्मिता- जी बाबू जी
बाबू जी- पिछले हफ्ते से मेरा एटीएम कार्ड गायब है शायद इतवार को सब्जी के पैसे देते वक्त मंडी में ही गिर गया।
स्मिता- कोई बात नहीं बाबू जी मैं एप्लीकेशन दे दूंगी कुछ दिनों में दूसरा मिल जाएगा।
बाबू जी- और जो किसी को मिल गया हो और उसने मेरे खाते से पैसे निकाल लिए हो तो।
स्मिता- नहीं बाबू जी ऐसा नहीं होता।
बाबू जी- मतलब
स्मिता- एटीएम का जो पासवर्ड है ना मतलब संकेत शब्द जब तक वह किसी को पता ना चले कोई चुन्नी भी नहीं निकाल सकता आपके खाते से।
बाबू जी- अच्छा हां, और मैं पैसे अगर ना निकालने जा पाऊं और तुझे भेजूं तो।
स्मिता- तो आपको मुझे पासवर्ड बताना होगा बस फिर मैं निकाल आऊंगी पैसे।
बाबू जी- तो फिर तुझे पीहू के लिए इतना परेशान होने की क्या जरूरत है ऐसा ही एक पासवर्ड पीहू को दे दे।

यह कहकर बाबूजी मुस्कुराने लगे अब स्मिता बिल्कुल निश्चिंत होकर टिफिन तैयार करने लगी और हां एक पासवर्ड भी सोच रही थी। पीहू की सुरक्षा के लिए ऐसा कौन सा शब्द है जिसे मे पासवर्ड बना लूं। कोई ऐसा शब्द होना चाहिए जो पीहू को याद भी बना रहे।
तभी पीहू कहती है- मम्मा मुझे दूध दो ना।
स्मिता- हां बेटा स्मिता दूध में कुछ केसर के रेसे डालकर पीहू को दूध देती है और वापस रसोई के काम में लग जाती है।
तब पीहू दूध का गिलास रखते हुए बोली, "आई एम आ स्ट्रांग गर्ल"

स्मिता- यह क्या बोल रही है पीहू।
पीहू- मम्मा वो टीवी में बोलते हैं ना, आई एम आ कॉम्प्लेन गर्ल। मैंने वही बोला और मैंने सैफरन वाला दूध पिया तो मैं सैफरन गर्ल।

तभी मां सोचती हो - अरे क्यों ना पासवर्ड सेफरन ही रख दिया जाए, हाँ यह ठीक रहेगा फिर वो पीहू को अपने पास बुलाती है और प्यार से गोद में बिठा कर कहती है सुनो पीहू अगर कभी बहुत इमरजेंसी हुई और स्कूल से तेरे पापा या दादाजी के अलावा कोई और तुम्हें लेने आए तो तुम क्या करोगे।


पीहू- कुछ नहीं मम्मा घर आ जाऊंगी।
स्मिता- नहीं पीहू, आज मैं तुम्हें एक शब्द बताती हूं। "सैफरन" ठीक
पीहू- तो मम्मा
स्मिता-  यह कि जब तक तुमसे यह ना कहे की मम्मी ने तुम्हारे लिए सैफरन वाला दूध रखा है। तब तक तुम किसी के साथ मत आना। चाहे वह बाजू वाले अंकल या कोई भी क्यों ना हो।

पीहू- ओके मम्मा।
फिर दूसरे दिन पीहू को स्कूल तो भेज दिया, पासवर्ड भी बता दिया। पर अब भी स्मिता पूरी तरह से संतुष्ट नहीं थी। वह चाहती थी कि एक बार यह सुनिश्चित हो जाए कि पीहू समझ गई है बात को ।

स्मिता- "कुछ दिनों बाद" अरे आज तो घर पर कोई नहीं है लगता है पीहू को लेने मुझे ही जाना होगा तभी उसे मिस्टर शर्मा देखें जो उनका बेटा रोहन भी उसी स्कूल में पढ़ता था जिसमें पीहू पड़ती है।

स्मिता- भाई साहब क्या आज आप रोहन के साथ पीहू को भी ले आएंगे। क्योंकि बाबूजी और पीहू के पापा घर पर नहीं है। हां हां हां भाभी जी क्यों नहीं। थोड़ी देर बाद मिस्टर शर्मा अपनी बेटी को लेकर आ गऐ पर पीहू को नहीं लाए।

स्मिता- क्या हुआ भाई साहब पीहू को नहीं लाए। मैंने तो बहुत कहा भाभी जी, पर वो पता नहीं क्यों कुछ पासवर्ड पासवर्ड बोल रही थी। मैंने बहुत कहा पर वो आई ही नहीं, अच्छा चलता हूं।
स्मिता- हे भगवान वह अकेली बैठी होगी बेचारी तभी  बाबू जी आ गए।

बाबूजी- क्या हुआ बहू, कौन अकेली बैठी होगी।
स्मिता- बाबूजी पीहू, मैंने शर्मा भाई साहब को बोला कि रोहन के साथ पीहू को भी ले आए, पर
बाबूजी- पर क्या बहू
स्मिता-  पर पासवर्ड बताना भूल गई
बाबूजी- और वह बिना पासवर्ड बताएं आई नहीं है ना।स्मिता- जी बाबू जी।
बाबूजी- तब तो तुम्हारी मेहनत सफल हुई चिंता मत करो मैं अभी जाकर ले आता हूं।

बाबूजी थोड़ी ही देर मैं पीहू को ले आते हैं आते ही  स्मिता पीहू को गोद में उठा कर सीने से लगा लेती है मेरी प्यारी समझदार बेटी। और प्यार करने लगती हैं ।

शिक्षा-  जिंदगी की हर परेशानी का हल हमारे आस-पास ही होता है इसलिए हमें धैर्य से काम लेकर उसका हल निकालना चाहिए दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको हमारी यह कहानी पसंद आई होगी कृपया कर लाइक और शेयर करना मत भूलिए गा। 

Hindi kahani स्कूल का पहला दिन Best  inspirational and motivational story for kids and students in hindi.

यह कहानी है सूरज की, जो अपने माता पिता के साथ एक नए शहर में रहता था। और उसे नए स्कूल में जाना था। वह नाश्ता कर ही रहा था कि तभी, बाहर स्कूल बस हॉर्न बजाती है। वह अपना स्कूल बैग पीठ पर टांगता है और अपने माता-पिता को बाय करते हुए घर के बाहर खड़ी स्कूल बस में चढ़ता है। 

और स्कूल बह चल पड़ती है। वह देखता है कि आगे की एक सीट खाली है वो उसी पर बैठ जाता है। तभी पीछे वाली सीट पर बैठा हुआ राहुल कहता है "देखो इधर मत बैठो पीछे आ जाओ" सूरज राहुल को देखता है और सोचते हुए राहुल के पास बैठने चला जाता है।

राहुल कहता है, तुम्हें पहले तो नहीं देखा इस बस में, सूरज कहता है, हां आज मेरा पहला दिन है स्कूल में, "तुमने मुझे वहां बैठने से मना क्यों किया अभी"
"आज तुम्हारा पहला दिन है ना अभी समझ जाओगे" "सूरज सोचने लगता है, तभी स्कूल बस रुकती है। और उसमें राजेश चढ़ता है। 

तब राजेश उसी सीट पर बैठता है जहां पहले सूरज बैठा था। राजेश के बस में आते ही सभी बच्चे घबरा जाते हैं। सूरज सभी बच्चों को घबराए हुए देख रहा था। राजेश आगे की सीट पर बैठे दोनों बच्चों को डराते हुए पूछता है।

"क्यों रे" कैसे हो तुम दोनों, बच्चे डरते हुए कहते हैं 'ठीक है राजेश भाई' आप कैसी हो ? राजेश एक बच्चे की गाल खींचते हुए कहता है 'बढ़िया रे, " बच्चा चिल्लाता है आ आ आ" यह सब पीछे बैठे बच्चे और दोनों देख रहे होते हैं तभी राहुल, सूरज के कान में कहता है। इसलिए मना किया था मैंने, वहां बैठने के लिए। "थैंक यू दोस्त थैंक यू" तुम ने बचा लिया।

नहीं तो आज पहला दिन ही आखरी दिन हो जाता। तभी राजेश दूसरे बच्चे से कहता है, "चल रे थोड़ा बाजू को दबा दे" वह बच्चा राजेश की बाजू को दबाने लगता है। सूरज राहुल से कहता है। अगर वह सबको इतना तंग करता है तो टीचर से उसकी शिकायत क्यों नहीं करते। 

इस पर राहुल कहता है, शिकायत की थी पर शिकायत इसके ऊपर कुछ असर नहीं किया और जिस ने शिकायत की थी उसने इससे तंग आकर मजबूरन स्कूल छोड़कर जाना पड़ा। सूरज खुद से कहता है हुं हुं.....।

लगता है, कुछ ज्यादा बिगड़ गया है। सूरज क्लास में पढ़ कर दोपहर की छुट्टी के बाद स्कूल बस मैं सोचते हुए घर पहुंचता है। उसकी मां उसे कहती है "आ गए बेटे" चल कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूं। मां टेबल पर खाना रखती है। तभी वह वहां आता है और कुर्सी पर बैठकर राजेश के बारे में सोचने लगता है। 

मां उसे सोचते हुए देखती है और पूछती है। तो कैसा रहा आज का दिन, दोस्त दोस्त बने या नहीं, वह कहता है "अच्छा" दोस्त तो बने पर एक रह गया है। मां उसे परेशान देखते हुए पूछती है। "मतलब, ! क्या बात है ! मुझसे कहो मैं भी तुम्हारी दोस्त हूं ना। सूरज मां को देखता है और फिर स्कूल बस में जो हुआ वह सब बता देता है। मां सब समझने के बाद कहती है। 

जैसे कि तुमने मुझे यह बात दोस्त होने के नाते बताई है, तो मैं भी दोस्त की तरह ही तुम्हें सुझाव दूंगी। वह सूरज को समझाने लगती है और मां फिर बाहर से दो छड़ी लाती है फिर बड़ी आसानी से पहले एक छड़ी को तोड़ती है और फिर दूसरी छड़ी को।सूरज की समझ में कुछ नहीं आ रहा था, फिर माँ उन चारों छड़ी को एक साथ तोड़ने की भरपूर कोशिश करती है।

पर वह चारों छड़ियां एक साथ इतनी मजबूत हो जाती है कि टूटती ही नहीं है। थक हार कर वह उन छडियों को टेबल पर रख देती है। सूरज समझ जाता है वह खुश होकर अपनी मां के गले लग जाता है और कहता है। "मैं समझ गया मां" और अगले दिन सुबह  सभी बच्चे स्कूल बस में बैठे हुए होता है, तभी बस रुकती है और राजेश उस बस में चढ़ता है। और देखता है कि उसकी सीट पर राहुल बैठा हुआ है। 

राजेश उसे कहता है "क्यों रे" तुझे पता नहीं इस सीट पर मैं बैठता हूं। राहुल कहता है, पता है पर आज मैं बैठूंगा इस पर। राजेश कहता है, लगता है तू ऐसी नहीं मानेगा। राजेश राहुल को मारता रहता है तभी सूरज कहता है। खबरदार जो राहुल को हाथ लगाया। राजेश गुस्से में कहता है तो तू मुझे रोकेगा। तभी बस के सभी बच्चे खड़े हो जाते हैं और कहते हैं। 

नहीं हम रोकेंगे, नहीं हम सब रोकेंगे, नहीं हम सब रोकेंगे। राजेश सभी बच्चों को एक साथ खड़े देखता है तो डर जाता है और कहता है। तो कोई बात नहीं यह बैठ जाऐ यहाँ पर। मैं पीछे बैठ जाता हूं, सभी बच्चे राजेश को डरा हुआ देखकर अपनी एकता पर खुश होते हैं। सूरज और राहुल सभी बच्चों को खुश देख कर मुस्कुराते हैं।

शिक्षा-  एकता में शक्ति होती है एकजुट होकर हम बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।



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