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Hindi kahani- अन्न का महत्व

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Moral story
राहल अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। मम्मी- पापा, दादा-दादी सब उसे बहुत प्यार करते थे। राहुल पढ़ने के साथ-साथ खेल-कूद में भी बहुत अच्छा था। कई खेल प्रतियोगिताओं में विजेता रहा था।

बस उसकी एक ही बुरी आदत थी कि वह अन्न की बहुत बर्बादी करता था। स्कूल में लंच के लिए जो टिफिन मम्मी उसे देतीं, वह उसमें से थोड़ा बहुत खाता और बाकी छोड़ देता था।


घर पर भी खाने की प्लेट में कभी सब्जी तो कभी रोटी छोड़ देता था। मम्मी उसे बहुत समझाती थीं कि खाने को यूं बर्बाद नहीं करना चाहिए, पर वो सुनता ही नहीं था। अन्न बर्बाद करना अब उसकी आदत बन चुकी थी।

एक बार राहुल मम्मी के साथ बाजार गया। लौटते समय उसकी नजर कुछ बच्चों पर गई, जो एक रेस्त्रां के बाहर कचरे की पेटी से कुछ निकालकर खा रहे थे। राहुल ने मम्मी से पूछा, 'मम्मी, ये  बच्चे क्या कर रहे हैं?


मम्मी ने दुखी स्वर में बताया, 'दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें खाना नसीब नहीं होता। खाने के अभाव में लोग भूखे मर जाते हैं। ये बच्चे भी भूखे हैं। इसलिए इन्हें कचरे की पेटी से जो कुछ भी खाने को मिल रहा है, खा रहे हैं।

मम्मी ने देखा कि राहुल बहुत ध्यान से उनकी बात सुन रहा है तो उन्होंने आगे और भी बहुत कुछ बताया, 'भारतीय एक संस्कृति में अन्न को भगवान का दर्जा दिया गया है।

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यही कारण है कि भोजन जूठा छोड़ना या उसका अनादर करना पाप माना जाता है। लेकिन अब हम अपनी यह संस्कृति भूल गए हैं। यही कारण है कि होटल-रेस्त्रां के साथ ही शादी जैसे आयोजनों में सेकड़ों टन खाना रोज बर्बाद हो रहा है। एक तरफ

अरबों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं,कुपोषण के शिकार हैं, वहीं बेशुमार खाना रोज बर्बाद किया जाता है।'यह सुनकर राहुल की आंखों में आंसू आ गए। वो अपनी मम्मी से लिपटकर बोला,

'मम्मी, मैं प्रॉमिस करता हूं आज  से मैं खाना कभी बर्बाद नहीं करूंगा।'राहुल ने यह जानना चाहा, 'मम्मी,क्या हम इन बच्चों को कुछ खाने को दे सकते हैं?

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मम्मी ने प्यार से राहुल के सिर पर हाथ फेरा और उसे लेकर पास की दुकान पर गई। वहां उन्होंने खाने का  कुछ सामान खरीदा और उन बच्चों को जाकर बांट दिया। उस वक्त राहुल के चेहरे पर एक खुशी और संतुष्टि का भाव  था।

दूसरे दिन राहुल ने अपना पूरा टिफिन खत्म किया और घर पर भी खाने की प्लेट में कुछ नहीं छोड़ा। राहुल की मम्मी बहुत खुश थी, क्योंकि अब राहुल को अन्न का महत्व समझ में आ गया था।


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