नए साल का जश्न. New year special story in Hindi for kids. [Motivblog story]


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Hindi  kahani- नए साल का जश्न. 

New year special story in Hindi for kids.


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सियाली के दादा जी की तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए पापा ने निर्णय लिया कि वह पूरे परिवार के साथ गांव जाएंगे। सियाली को विता हुई वह इस बार न्यू ईयर कैसे सेलिब्रेट करेगीर गांव में तो शहर जैसा माहौल नही रहता है। लेकिन फस्र्ट जनवरी को उसने गाव में जो देखा, वो उसे बहुत माया। सियाली ते नए साल पर एक ऐसा संकल्प भी लिया, जो सभी बच्चों को लेना चाहिए।

इस बार सर्दी की छुट्टियों में गांव चलेंगे। दादाजी की तक्यित ठीक नहीं है।' पापा, मम्मी से कह रहे थे। सुनते ही सियाली ने चौंक कर दोनों की ओर देखा। 'तो क्या नए साल तक हम वहीं रहेंगे? सियाली ने मम्मी से पूछा। मम्मी के हां कहने पर वह उदास हो गई। ऐसा नहीं है कि

उसे गांव पसंद नहीं या दादा-दादी से लगाव नहीं है। बस! वह नए साल का जश्न अपने दोस्तों के साथ घूम-धाम से मनाना चाहती है। गांव में देर रात तक जागकर पार्य करना संभव नहीं है, क्योंकि वहां सबलोग जल्दी सोते और जल्दी उठते हैं।

सियाली ने पापा को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन
पापा नहीं माने। उनके समझाने पर सियाली भी समझ गई कि पार्टी से अधिक जरूरी दादाजी की तबियत है।
इसलिए वह मम्मी-पापा के साथ गांव जाने के लिए तेयार हो गई। गांव जाकर पता चला कि दादाजी की तबियत सचमुच बहुत खराब है।

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उन्हें अस्थमा का दौरा पड़ा है। पापा की देखभाल और दवाओं के असर से अब दादा जी बेहतर महसूस कर रहे थे। आज तो उन्होंने सियाली को कहानी सुनाने का वादा भी किया था। 'दादाजी, आपकी तबियत इतनी खराब कैसे हुई?' सियालीने पुछा। 'अरे बिटिया ! ये बीमारियां भी ना... बच्चे और

बूढ़े इनकी चपेट में जरा जल्दी आ जाते हैं। धूल, धुआं और प्रदूषण से ये अधिक खतरनाक हो जाती हैं। बीमारी की बातें छोड़ो। तुम तो कहानी सुनो।' दादाजी ने प्यार से सियाली को अपने पास बिठाया। 'नहीं दादाजी! पहले आप मुझे यह बताइए कि धूल, धुआं और प्रदूषण से

बीमारी का क्या संबंध है?' सियाली दादाजी की बात सुनकर बेचैन हो गई। "बिटिया, इस मौसम में ठंड के कारण धूल और धुआं ऊपर आसमान में नहीं जा पाता और हमारे आस-पास ही बना रहता है। वैसे भी आजकल शहर गांव से अधिक दूर नहीं होते हैं।

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इसलिए लोग शहर में नए साल का जश्न मनाते हुए पटाखों का प्रदूषण करते हैं। इससे शहर के आस-पास वाले गांवों की हवा में भी प्रदूषण बढ़ जाता है। मुझ जैसे बूढ़े लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं।' दादाजी हंसते हुए बोले लेकिन सियाली सोच में पड़ गई।

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उसको बार-बार अपना स्कूल बैग याद आ रहा था, जिसमें उसने सबकी नजरों से छिपा कर दिवाली के बचे हुए पटाखे भर कर रखे थे, नए साल पर फोड़ने के लिए। आज 31 दिसंबर है। साल का आखिरी दिन। रात हो गई थी।

सब लोग खा-पीकर रजाई में दुबक लिए थे। तभी दादी गरमा-गरम मूंगफली सेंककर ताजा गुड़ के साथ ले आई। सियाली ने खाया तो बस खाती ही रह गई। मूंगफली की चिक्की तो उसने कई बार खाई थी लेकिन गुड़ और मूंगफली का ऐसा स्वाद उसने कभी नहीं चखा था। उसने हाथ का अंगूठा और पहली अंगुली मिलाकर

दादी को इशारे से कहा,'वाओ!' दादी मुस्कुरा दीं। रात बीतती जा रही थी। घड़ी की सुइयां बारह बजने की तरफ खिसक रही थीं। सियाली ने महसूस किया कि शहर की तरह न तो यहां कोई तेज शोर वाला म्यूजिक बज रहा था और ना ही कोई पटाखे या आतिशबाजी कर रहा था, और तो और घर में शायद किसी को बाद तक

नहीं था कि कुछ ही पलों में साल बदलने वाला है सियाली के मन की उथल-पुथल से अंजान सब लोग थोड़ी देर बातचीत के बाद सोने की तैयारी करने लगे।अनमनी-सी सियाली भी सो गई।

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अगले दिन सुबह सियाली अभी अपनी रजाई में ही थी कि मम्मी ने उसका माथा चूमकर उसे 'हैप्पी न्यू ईयर' विश किया। उसने बिस्तर में घुसे-घुसे ही देखा कि पापा, दादाजी और दादी के पांव छूकर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं। कुछ ही देर में गांव के कुछ अन्य लोग भी दादाजी से आशीर्वाद लेने आए। दादाजी गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति

जो थे। मम्मी ने खेत की ताजा माजरों से बना हलवा खिलाकर सबका मुंह मीठा।करवाया और अपने बड़ों का आशीर्वाद लिया। अब तक सियाली भी पूरी तरह से नींद से जग चुकी थी। आज दादी ने पूजा करते समय सिबाली को भी उसमें शामिल किया। 

पूजा के बाद प्रसाद देते. हुए दादी ने उसे ढेर सारे आशीर्वाद दिए। यह सब देखकर सियाली को बहुत अच्छा लग रहा था। 'सियाली, आज दोपहर बाद हम लोग वापस चलेंगे। आज नए साल का पहला दिन है। कल रात न सही, आज शाम तुम अपने दोस्तों के साथ जश्न मना लेना। और हां! वो पटाखे भी फोड़ लेना

जो स्कूल बैग में छिपाकर रखे हैं।' पापा ने हंसते हुए कहा। 'नहीं पापा, पार्टी के लिए पटाखों की जरूरत नहीं है। है ना दादाजी और में आज नए साल पर संकल्प लेती हूं कि इस बात को हमेशा याद रखूगी।

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सियाली ने दादाजी को अस्थमा की दवा लेने वाला पंप थमाते हुए कहा। 'ये हुआ ना सही मायने में हैप्पी न्यू ईयर।' पापा ने सियाली की पीठ थपथपाकर शाबासी दी। 'इस बात पर थोड़ा-सा गाजर का हलवा मुझे भी।' दादाजी ने कहा। मम्मी सबके लिए हलवा ले आई। सब एक- दूसरे को 'हैप्पी न्यू ईयर' कहते हुए मुंह मीठा करने लगे।



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