Top 10 Best Motivational Blogs for stories [2020] in Hindi.

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 1. Motivational blog story- भाई का प्यार.
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पॉल को उसके भाई ने Christmas पर एक कार तोहफा में दी। Christmas की पूर्व संध्या पर जब वह अपने ऑफिस से बाहर निकला तो, उसने देखा कि एक गरीब लड़का उसकी कार के चारों तरफ घूम कर उसे  हसरत से देख रहा था। उसने पूछा, ‘क्या यह आपकी कार है?

पॉल ने सिर हिलाकर कहा, ‘हां, मेरे भाई ने Christmas पर मुझे तोहफे में दी है।‘ लड़का हैरान रह गया। उसने कहा आप का मतलब है कि आपके भाई ने यह आपको तोहफे में दी है, कास....’ फिर वह अचानक रुक गया।

पॉल जानता था कि उस लड़के की इच्छा क्या होगी। उसकी यह इच्छा होगी कि उसका भी ऐसा ही कोई भाई होता। लेकिन लड़के ने कहा, ‘काश, मैं भी ऐसा भाई बन सकूं। पॉल ने हैरानी से उस लड़के को देखा और फिर एकाएक उसकी मुंह से यह निकल गया, क्या तुम अभी मेरी कार में घूमने चलोगे?’ ‘ओह हां जरूर मुझे बहुत अच्छा लगेगा।
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घूमने के दौरान कार में थोड़ी देर तक चुपचाप बैठने के बाद लड़का बोला, ‘क्या आप मेरे घर तक चलेंगे?’ इस बात पर पॉल थोड़ा मुस्कुराया। उसे लगा कि वह अपने पड़ोसियों को यह दिखाना चाहता होगा कि वह इतनी शानदार कार में घर आ सकता है। लेकिन फिर लड़के ने कहा, ‘क्या आप वही रुकेंगे जहां पर दो सीढ़िय है।

वह सीढ़ियों पर चढ़कर अंदर गया। थोड़ी ही देर में पॉल को उसके आने की आवाज सुनाई दी, लेकिन वह धीरे-धीरे आ रहा था। उसका छोटा अपाहिज भाई उसकी गोद में था। उसने अपने भाई को नीचे वाली सीढ़ियों पर बैठा दिया और फिर कार की तरफ इशारा किया।

‘देखो भाई, उस कार को देखो। उस आदमी के भाई ने उसे यह कार Christmas पर तोहफे में दी है। किसी दिन में भी तुम्हें इसी तरह की एक शानदार कार दूंगा।...

पॉल कार से उतरा और उसने उस अपाहिज लड़के को उठाकर अपनी कार की अगली सीट पर बैठा दिया। बड़ा भाई भी आकर उसके पास ही बैठ गया और उन तीनों ने कार में एक यादगार सैर की। उस शाम पॉल को समझ में आ गया था, देने वाला जायदा भाग्यवान होता है।

2. Motivational Blogs story- तोहफा
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पहले से रखी वस्तु  को किसी और को देने  की  परंपरा को  भैया ने बड़ी  हल्के-फुल्के अंदाज में संभाल लिया।

'मेरी भाभी' अपनी अलमारी से  कुछ खोज रही थी  साथ ही साथ  झुंझलाहट में बड़बड़ती भी जा रही थी।  "और कहां गई" यही तो रखी थी। रोज सामने ही दिख जाती है अब आज  ढूंढ रही हूं तो, मिल नहीं रही है।

'अरे भाई "आज सुबह से क्या खोज रही हो" भैया ने पूछा अजी एक साड़ी खोज रही हूं दीदी आज आ रही है ना, राखी पर सोच रही हूं, दीदी को एक साड़ी गिफ्ट कर दूं। भैया ने जवाब दिया। 'अरे नहीं मिल रही है तो बाजार से नई खरीद के ले आओ' भैया ने समझाया।

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नहीं जी अच्छी साड़ी है पिछले साल जब मैं Christmas में अपने मायके गई थी तो, भाभी ने मुझे गिफ्ट दि थी। नई की नई रखी है सोच रही हूं, वही साड़ी गिफ्ट कर दूं, दीदी को।

भैया हंसते हुए बोले इतनी अच्छी थी तो तुम ही पहन लेती दीदी के लिए साल भर से क्यों रखी हो जाओ मार्केट से नई साड़ी खरीद कर ले आओ वैसे भी साल भर से रखी साड़ी नई नहीं होती है।

3. Motivational story-  ओल्डर लेडी ने अपने 70th बर्थडे सेलिब्रेशन
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एक ओल्ड लेडी ने अपने 70thबर्थडे सेलिब्रेशन करने के लिए एक लग्जरी होटल में रूम बुक किया, और रात वहीं बिताई। अगले दिन चेक आउट करते हुए receptionist न उसे ₹25000 का बिल दिखा दिया। 
₹25000 का बिल देख कर ओल्ड औरत चौक गई। और उसने रिसेप्शनिस्ट से बोला मुझे लगता है आपसे गलती हुई है यह बिल काफी ज्यादा है शायद आपने मुझे गलत बिल दे दिया है।

'रिसेप्शनिस्ट' नो मैम यह बिल आपका ही है एंड अमाउंट भी बिल्कुल सही है। औरत को गुस्सा आया और उसने पूछा कि वह उसे इतने ज्यादा चार्ज क्यों कर रहे हैं। रूम्स अच्छे हैं परंतु एक रात के रुकने के लिए 25000 बहुत ज्यादा है मैंने तो रूम में कुछ ऑर्डर भी नहीं किया। औरत ने गुस्से में कहा।

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"रिसेप्शनिस्ट" मैम 25000 यहां के स्टैंडर्ड रेट है उस लेडी ने होटल मैनेजर से भी बात करनी चाहि। मैनेजर आए" रिसेप्शनिस्ट ने उससे पहले ही सजेशन इसके  बारे में warn कर दिया था।

मैनेजर ने आते ही कहा मैम इस होटल में olympic-sized स्विमिंग पूल है। एग्जॉटिक स्पेस,लग्जरी बार, नाइट क्लब एंड और भी कई सारी फैसिलिटी है जो एक्सक्लूसिवली होटल गेस्ट के लिए है।

"लेडी" यह अच्छा है परंतु मैं यह सर्विस युज़ नहीं कि, "मैनेजर" पर आप इन्हें यूज कर सकती थी। मैनेजर ने यह भी कहा कि, यहां डेली नाइट शो में इंटरनेशनल काॅनटेस्ट एंड म्यूजिक बैंड प्रोग्राम करते हैं

जो कि गेस्ट काफी पसंद करते हैं।"लेडीस" पर मैं कोई शो अटेंड नहीं किया "मैनेजर" पर वह यहां है और आप उसे अटेंड कर सकती थी। 'लेडी' पर मैं इन सब सर्विस को यूज़ ही नहीं किया।

बहुत देर बहस करने के बाद उस औरत ने फाइनली पेमेंट करने के लिए सोचा उसने चेक बनाया एंड मैनेजर को दिया। मैनेजर चेक देख कर चौक गया। "मैनेजर" मैम यह चेक तो सिर्फ 5000 का है "लेडी" पर मेने आपको मेरे साथ रात गुजारने के लिए 20000 चार्ज किया है। परंतु मैं तो ऐसा कुछ किया ही नहीं। "लेडी" कोई बात नहीं बट मैं कल यही थी और आप ऐसा कर सकते थे।


4. Motivational Blogs story- गिफ्ट... 
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हर बार की तरह आखिरी वक्त पर बाजार जाने के बजाय इस साल पहले से ही तैयारी कर ली थी.पर पासा उल्टा पड़ गया। बेटा रोज शाम कॉलोनी के बच्चों के साथ क्रिकेट खेलता है। ईशान मेरे बेटे से तीन कक्षा पीछे है, पर सब क्रिकेट फ्रेंड हैं। वो अपने बर्थडे पर सब को जरूर बुलाता है।

उसका जन्मदिन 26 जनवरी को पड़ता है। वो बर्थडे का निमंत्रण देने 25 जनवरी को रात 8 से 9 के बीच ही आता है, जबकि अगले दिन 26 जनवरी होने के कारण सारा बाजार बंद रहता है।

अतः उसका निमंत्रण आते ही मेरा बेटा जिद करने लगता है और मुझे रात में ही बाजार गिफ्ट लेने जाना पड़ता है। ऐसा पिछले तीन वर्षों से हो रहा है।

22 जनवरी को किसी काम से बाजार जाना हुआ। लौटते समय खिलौने की दुकान देखकर याद आया कि ईशान का जन्मदिन तो आ ही रहा है और रात को जाने से बचना है तो उसका गिफ्ट भी लेती चलूं।

बेटे को भी यह विचार ठीक लगा गिफ्ट पैक करवा के हम घर आ गए। 25 जनवरी को बेटा रात 10 बजे तक उसके निमंत्रण का इंतजार करता रहा, पर वह नहीं आया।

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26 जनवरी को बर्थडे पार्टी भी कैंसिल हो गई। गिफ्ट को लेकर बड़ा मलाल हुआ कि क्यों जल्दबाजी में ले लिया। बाद में पता चला कि उसके परिवार में शादी थी।  सब लोग वहीं गए थे, सो बर्थडे भी परिवार के साथ मनाने के लिए यहां की पार्टी कैंसिल कर दी थी।

बेटे ने गिफ्ट को संभाल कर रख दिया है, ताकि कुछ समय बाद एक अन्य दोस्त के जन्मदिन पर दे सके। मैंने भी चैन की सांस ली चलो, 'किसी के काम तो आएगा।' लेकिन अब इस बात की चिंता है कि अगर उस दोस्त ने भी जन्मदिन नहीं मनाया तो...?


5. Motivational Blogs story- समझाइस
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बेटे को बाहर जाता देखकर बाबूजी ने पूछा 'कहां जा रहे हो नीलेश?' 'पूना से मेरा दोस्त विजय आया है, बस उसी
से मिलने जा रहा हूं।' 'कहीं मत जाओ, घर में ही सुरक्षित बैठो।

जानते नहीं शहर में कोरोना का कहर फैला हुआ है।' बाबूजी ने चिंताव्यक्त करते हुए कहा। 'बाबूजी, कोरोना हम नौजवानों का कुछ नहीं बिगड़ेगा वो तो आपकी उम्र वालों का दुश्मन है।'

नीलेश ने लापरवाहीपूर्ण जवाब दिया। बहुत मना करने पर भी वो नहीं माना तो बाबूजी ने कहा- अब तुम जाने की जिद ही कर रहे हो, तो उससे दो गज दूर बैठना और हां उसे छूना मत।'

'ठीक है।' कहते हुए वह चला गया। कुछ देर बाद वहां से लौटने पर बाबूजी ने उसे अलग कमरे में रहने के लिए कहा। नीलेश ने भी बाबूजी की बात मान ली।

अचानक कुछ दिनों बाद नीलेश की तबियत बिगड़ने लगी बाबूजी ने संयम से काम लिया तथा उसे अच्छी तरह मास्क से पैक करके हॉस्पिटल ले गये। डॉक्टर द्वारा चेकअप के बाद नीलेश में कोरोना के लक्षण पाए गए।

वह घबराकर रोने लगा, बाबूजी ने उसे हिम्मत बंधाई तथा उसे समझाया। इस दौरान उन्होंने नीलेश से बराबर दूरी बनाकर रखी। हॉस्पिटल में नीलेश का बराबर इलाज चला उसे फोने पर बाबूजी लगातार हिम्मत बंधाते रहे।

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नीलेश को अपनी गल्ती का एहसास था कि अगर उस दिन वह बाबूजी की बात मानकर अपने दोस्त से मिलने बाहर न जाता, तो आज उसकी ऐसी हालत न होती।

आज बाबूजी उसकी सेहत के लिए कितना परेशान हो रहे हैं। यही सोचते हए उसे लगा कि अब उसे जीना है अपने बाबूजी के लिए, अपनी मां के लिए।

उसमें ठीक होने की हिम्मत बढ़ने लगी। कुछ दिनों बाद वह ठीक हो गया। आज नीलेश कोरोना फाइटर्स के रूप में सबको यही संदेश देते हुए नजर आता है कि अगर आपको घर परिवार का कोई बड़ा सदस्य समझाइश दे तो उसकी बात मानने में ही समझदारी है।


6. Motivational Blogs story-हक
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'कोमल! जरा इधर आओ बिटिया। 'जी दादी, आई। कुछ चाहिए, आपको..... 'नहीं, तनिक बैठो हमारे पास। आजकल तुम हमारे पास बैठती ही नहीं हो। कुछ नाराज हो क्या ? 'नहीं तो दादी, कुछ चाहिए तो बोलिए। 

मुझे वॉक पर जाना है। 'बिटिया, तुम जरूर हमसे नाराज हो, बोलो क्या बात है, तुम्हारे पापा की मां है, चेहरा पढ़ना जानते हैं हम।'

हां मैं आपसे नाराज हूं दादी। आप मेरे पापा को बात-बात पर गुस्सा करती हो, यह मुझे अच्छा नहीं लगता बस। थोड़ा भी आराम नहीं करने देती उनको।

आप सोचती भी नहीं कि उनके भी आराम करने के दिन है, कोई छोटे तो है नहीं वो। अगले महीने रिटायर हो जाएंगी वो। मुझे अच्छा नहीं लगता कोई भी मेरे पापा को डांटे।

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'तो यह बात है.....एक बात बताओ, तुम्हारी मम्मी तुमको और पवन को प्यार करती है ना, और कभी-कभी गुस्सा भी करती है, तो क्या तुम अपनी मम्मी से भी नाराज हो क्या ?

'मां है वो, हमारी भलाई के लिए ही हमें डांट टी होंगी। और आप पापा की मम्मी हैं..... मैं समझ गई दादी, लेकिन आप तो उन्हें ऑफिस से आते ही बुला लेती हो।' 'तुम्हारे पापा को अस्थमा है,

और बचपन से ही बाहर से आते ही वह ठंडा पानी पीता है। अब उनकी उम्र हो गई है, और इस तरह की बदपरहेजी उसके लिए ठीक नहीं। उसको ऑफिस से आते ही मैं अपने कमरे में इसलिए बुलाती हूं

ताकि वह फ्रिज का पानी ना पिए। खाने-पीने में भी इसलिए टोकती हूं। बहू की तो वह सुनता नहीं। तुम्हारा पापा मेरा बेटा है, समझी बिट्टू।' समझी दादी,


7. Motivational Blogs story-दूधिया रोशन
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माना कि अंधेरे हैंबढ़ भी रहे हैं लेकिन थोड़ी-थोड़ी रोशनी जो सबके पास है उसे बांट लेंतो अंधेरे के पांव उखडते देर नहीं लगेगी।

'सनो! सामान ज्यादा मत लेना, चलने में परेशानी होगी। और हां मोबाइल और चार्जर जरूर साथ रख लेना. अडी पड़ने पर किसी जिंदा आदमी-सा साथ निभाता है।' दीनू ने सामान बांधती पत्नी को फीकी-सी हंसी के साथ हिदायत दी, तो कपड़ों को पोटली में लपेटती कमला के हाथ रुक गए।

'क्या रखें और क्या छोड़ें, कपड़े-लत्ते रखें ना रखें लेकिन खाने-पीने का तो कुछ रखना ही होगा, कौन जाने कब तक ठिकाने पर पहुंचेंगे। पहुंचेंगे भी या नहीं, ये भी कहां तय है,' सोचती हुई कमला ने जमीन पर बिछी बोरी पर सोए नन्हे बेटे की तरफ़ नजर डाली।

कलेजे में एक हूक-सी उठी। 'कहाँ। तो बेटे को बड़ा आदमी बनाने के सपने देख रहे थे और आज जिंदगी बचाने तक के लाले पड़े हैं! कमला ने गहरी सांस भरी और पोटली दीन को थमा कर बेटे को गोद में उठा लिया।

खोली को ताला जड़ते समय दीनू के हाथ कांप रहे थे लेकिन कोरोना की हकीकत को भी तो झुठलाया नहीं जा सकता ना। 'कौन जाने अगला ठिकाना कहां हो हो।' सोचते हुए दीनू ने नज़र भर कर अपने आसपास देखा। आंखें गीली हो आईं।

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रे दीनू ! जरा जल्दी कर भाई। धूप तेज होने पर चलना नहीं हो पाएगा।' गांव जाने वाले दल के मुखिया बने रामकिसन ने आवाज लगाई। दीनू फटाफट ताले में चाबी लगाने लगा। कमला का मन कच्चा कच्चा होने लगा। रुलाई मानो फूट ही पड़ेगी। उसने बच्चे को अपनी ओढ़नी से ढंका और दीनू से आगे हो ली। 'इंतजार की भी आखिर एक हद होती है।

इसी आस पर महीना निकाल दिया कि लॉकडाउन आज खुलेगा... कल खुलेगा... फैक्ट्री की चिमनी फिर से आसमान की तरफ मुंह करके हंसेगी...' लेकिन महामारी है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही। ना हाथ में काम बचा, ना जेब में पैसा। मदद। भी कितने दिन तक मिलती रहेगी।

 गांठ में ही पैसा होता तो गांव छोड़कर यहां आते ही क्यों,' सोच-सोच कर दीनू का कलेजा मुंह को आ रहा था। यहां भूखों मरने से तो अच्छा है कि गांव ही चला जाए। और ना सही, कुछ समय बढे माई-बाबा के साथ ही बिताएंगे- यही सोचकर दीनू ने रामकिसन का गांव पैदल चलने का प्रस्ताव मान लिया।

हालांकि ऐसा करते समय वह भूला नहीं था कि गांव पहुंचने के बाद भी सरकार चौदह दिन तक घर नहीं जाने देगी। यह भी हो सकता है कि इन चौदह दिनों के भीतर ही देशबंदी खल भी जाए लेकिन दीनू का दिमाग अब काम करना बंद कर चुका था।

कहते हैं कि दिमाग भी तभी चलता है जब रोटी की आस पक्की हो। कहने को तो कमला ने भी बहुत कहा था कि जहां इतने दिन निकाले वहां थोडे दिन और सही. कोई न कोई रास्ता निकलेगा ही लेकिन दानू का सब अब जवाब दे चुका था।

आज रामकिसन की अगुआई में पच्चीस जनों का समूह पैदल यात्रा के लिए तैयार खड़ा था। दीन ने कमीज की बांह से अपनी आंखों की कोर पोंछी। अभी वह पलटा ही था कि किसी ने उसका पाजामा खींच लिया।

मुड़कर देखा, झबरा अपनी पूंछ हिला रहा था। उसकी आंखें भी दीनू को गीली-गीली सी लगीं। दीन के पांव जम गए। वह बैठ कर झबरे के बाल सहलाने लगा। 'अपनी ख़ुशी से कौन जाना चाहता है रे! लेकिन जिंदा रहना भी तो जरूरी है कि नहीं!

दीनू ने उसे समझाना चाहा लेकिन उसे अपनी ही आवाज गहरे कुएं में से आती महसूस हुई। लगा मानो वह झबरे को नहीं बल्कि स्वयं अपने आप को समझा रहा हो। झबरे की पीठ पर हाथ फेरकर दीनू चलने के लिए उठ खड़ा हुआ।

अभी दो कदम ही चला होगा कि सामने से कमला आती दिखाई दी। 'लगता है बुलाने आ रही है। मैं हूं कि देर पर देर किए जा रहा है।' दीन अपने कदमों में गति लाता पत्नी की तरफ बढ़ने लगा।

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'कमला की चाल में ये उत्साह कैसा? जाते समय तो इसके पांव उठाए नहीं उठ रहे थे और अब देखो... कैसे उड़ी चली आ रही है। अचानक क्या हो गया!' दीनू सोच रहा था। कमला नज़दीक आ चुकी थी।

गोद में बच्चा और तेज चलने के कारण उसकी सांस उखड़ रही थी। उसकी हड़बड़ाहट के कारण सोया हुआ बच्चा भी अब जाग चुका था। बच्चा रोने लगा, तो दीनू ने लपक कर उसको अपनी गोद में उठा लिया।

'अरे सुनो! शर्मा मेमसाब का फोन आया था अभी। कह रही थीं कि अब सरकार कुछ ढील दे रही है। मुझे कल से वापस काम पर बुला रही हैं। पूरी मदद को भी बोल रही हैं!' कमला ने एक ही सांस में सारा वाक़या कह सुनाया।

पति को यक़ीन दिलाने के लिए वह बार-बार आने हाथ में लिए मोबाइल को हवा में लहरा रही थी। उसने अपनी आंखें पति के चेहरे पर गड़ा दी और जवाब के लिए उसका मुंह ताकने लगी।

दीन को एक बार तो कुछ भी समझ में नहीं आया लेकिन जैसे ही कमला की बात का मतलबउसे समझ में आया, उसके चेहरे के भाव ही बदल गए। सिकुड़े हुए होंठ दो इंच तक फैल गए।

माथे की शिकन जरा हल्की पड़ी। अनपढ़ कमला ने पति का जवाब पढ़ लिया। वह उत्साह से भर गई। 'मैडम ये भी कह रही थीं कि अब मजूरी की भी आस बंधेगी। वो जवाब मांग रही थीं।

क्या कहूं, हां कह दं?' कमला अपने पढ़े को पक्का कर लेना चाहती थी। 'हां कह दे, और सुन! रामकिसन को मनाही भी भिजवा देना।' दीन ने मस्कराते हए कहा और पोटली में से रोटी निकाल कर झबरे को खिलाने लगा।

कमला ने पति से खोली की चाबी ली और दरवाजा खोल दिया। दाहिने हाथ की तरफ़ लगा बिजली का खटका दबाते ही खोली में सीएफएल की दृधिया रोशनी फैल गई।


8. Motivational Blog story- लॉकडाउन का मारा यह बेचारा 
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इन दिनों लॉकडाउन किसी के लिए सजा तो किसी के लिए वरदान बन गया है। लोग फिल्मी गीतों के साथ खुद का जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। वे गुनगुना रहे हैं 'बाहर से कोई अंदर न आ सके. अंदर से कोई बाहर न जा सके...।' भारतीय नारियां रेसिपी की फोटो ऐसे शेयर कर रही हैं, मानो इससे पहले कंदमूल-फल खाकर जीवन-यापन करती थीं।

खुश रहने के लिए साड़ी चैलेंज के बहाने जवानी की पिक शेयर कर दीपिका पादुकोण टाइप फील कर रही हैं। मर्द हमेशा की तरह खुद को बेचारा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वे अपनी बर्तन मांजते, झाडू लगाते फोटो डाल कर सहानुभूति और तारीफ बटोर रहे हैं। बच्चे होमवर्क और ऑनलाइन क्लास के बोझ तले दबे पड़े हैं। गरीब राशन के जुगाड़ में लगे हैं। इस सबके बीच किसी का ध्यान उन प्रेमी जोड़ों पर नहीं जा रहा है, जो मॉल और पिक्चर हाल में हाथ में हाथ डाले देखे जाते थे। 

कोरोना की बुरी नजर इनके प्यार को आ लगी है। प्रेमियों की वो प्रजाति, जो बीवी से छुपकर बाहर वाली के साथ दिल का सुकून तलाशते रहते थे, उनका तो कुछ नहीं बिगड़ा, उन्हें पिज्जा, चाउमीन भले ही न मिल रहा हो, घर का दाल-चावल तो मिल ही रहा है। सो पेट तो भर ही रहा है

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पर उन बेचारों का दर्द समझने वाला कोई नहीं है,जिन्होंने बड़ी मेहनत और इंवेस्टमेंट के बाद किसी तरह अपनी जिंदगी गुलजार की थी। ये वो प्रजाति है, जो मेट्रो की भीड़ को इग्नोर कर एक-दूसरे में ही खोए प्रेम साधना में तल्लीन हुआ करते थे या फिर जो अकसर भीड़ से दूर अपने लिए अकेलापन तलाशा करते थे। 

वे बेचारे आज घरों में मां-बाप और परिवार की नजरों के सामने हैं, उनका दिल ‘पिंजरे का पंछी मेरा दर्द जाने कोई..' गुनगुना रहा है। इस लॉकडाउन की वजह से जिस तरह प्राइवेट नौकरी वालों के दिल में नौकरी जाने का डर सता रहा है, उसी तरह बेचारे प्रेमीजन अपनी मोहब्बत के खोने के डर से रातों में सो नहीं पा रहे हैं। गर्लफ्रेंड का फोन रिचार्ज करने के पैसों का जुगाड़ करने में लगे प्रेमी, मां-बाप को खुश करने के चक्कर में घर के सारे काम दौड़-दौड़कर कर रहे हैं।

यहां तक कि झाडू-पोंछा भी मन लगाकर कर रहे हैं ताकि मां की नजरों में पुरुषोत्तम राम जैसे लायक पुत्र की छवि बन सके और घर बैठे पॉकेट मनी का जुगाड़ हो सके। मां की एक्स-रे जैसी नजरों से बचने के लिए तरह- तरह के जतन किए जा रहे हैं। फोन पर बात करने के लिए कभी बाथरूम तो कभी छत का आसरा ही बचा है। सबसे ज्यादा गहरे दुख में वे जोड़े डूबे हैं,

जिनका मामला या तो फाइनल सेटिंग पर था या जिनकी शादी होने वाली थी। वो बेचारे दर्द भरी आवाज में गा रहे हैं, 'मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता, अगर तूफां नहीं आता, किनारा मिल गया होता...।' हम सरकार से अपील करते हैं कि जिस प्रकार राशन, दवा आदि को जरूरी लिस्ट में रखा है, प्रेमियों के मिलन को भी जरूरत की लिस्ट में डालें और इनके मिलन की कुछ व्यवस्था करें।

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Note:- दोस्तों तो आपको स्टोरी कैसी लगी प्लीज कमेंट में बताए। यदि अच्छी लगी होगी तो आप अपने फैमिली वालों और दोस्तों के साथ इस पोस्ट को शेयर करें। थैंक यू ऑल द बेस्ट है।

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