होली पर सरप्राइज. Holi festival special story in Hindi for kids.

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Hindi kahani- होली पर सरप्राइज.  
Holi festival special story in Hindi for kids.

Holi festival special story in Hindi for kids.

पिंकी के पापा जब होली पर घर नहीं आए तो उसे बहुत गुस्सा आया कि वह क्यों नहीं आए? उन्होंने तो वादा किया था, होली पर वह उसके लिए पिचकारी लेकर आएंगे। मम्मी के समझाने पर पिकी अपने दोस्तों के साथ होली खेलने चली गई लेकिन जब थोड़ी देर बाद घर लौटी तो उसे ऐसा सरप्राइज मिला कि वह खुशी से उछल पड़ी।

होली आने में बस एक दिन बचा था। पिंकी के पापा दो दिन पहले ही भोपाल से आने वाले थे। लेकिन अब तक नहीं आ पाए थे। पिंकी के सारे दोस्तों ने पिचकारी और रंग खरीद कर रख लिया था। असल में सबके पापा आस-पास ही नौकरी करते हैं। लेकिन पिंकी के पापा भोपाल में नौकरी करते हैं।

वह हर त्योहार ऑफिस से छुट्टी लेकर अपने शहर रायपुर आ जाते हैं। होली पर भी उनको आना था। मगर इस बार होली के मौके पर उनको छड़ी नहीं मिल पा रही थी। पिंकी बहत उदास थी। मम्मी ने कई बार समझाया, 'बेटा, उदास होने की जरूरत नहीं है।

पापा होली पर नहीं आ सके तो क्या, होली के बाद आ जाएंगे।' इस पर पिंकी गुस्सा दिखाते हुए बोली, 'होली के बाद आकर क्या होगा? पापा ने तो भोपाल से पिचकारी लाने का वादा किया है। होली के बाद मैं पिचकारी से रंग कैसे खेल पाऊंगी?' 'इस साल नहीं तो अगले साल खेल लेना।

अभी मैं पिचकारी खरीद दे रही हूं।' मम्मी ने समझाया। 'नहीं, मुझे इसी साल पापा वाली पिचकारी से होली खेलनी है।' पिंकी और भी ज्यादा नाराजगी से बोली।  मम्मी ने पिंकी को गोद में बैठाया और बोलीं, 'बेटा, जिस तरह तुम पापा के आने की राह देख रही हो, वैसे पापा भी यहां आने के लिए परेशान हो रहे होंगे।

तुम्हारे साथ तो मैं हूं, तुम्हारा छोटा भाई बंटी है। लेकिन पापा तो वहां अकेले हैं। उनका मन कैसे लग रहा होगा, यह भी तो सोचो?' मम्मी की बात सुनकर पिंकी को लगा
पापा के ऊपर गुस्सा करना ठीक नहीं। फिर पापा हर बार उसके लिए खिलौने, मिठाइयां लाते हैं। हर बार टाइम से घर भी आ जाते हैं।

इस बार नहीं आ पाए तो क्या हुआ? पिंकी ने अपनी जिद छोड़ दी और बाहर जाकर बच्चों के साथ खेलने लगी। दुसरे दिन सुबह-सुबह ही सारे बच्चे ग्राउंड में होली खेलने के लिए इकट्ठे हो गए। पारुल ने उसे अपनी मछली के आकार वाली पिचकारी दिखाई।

Holi festival special story in Hindi for kids.

श्याम हाथी के शेप वाली पिचकारी चला रहा था। आरव ने पिचकारी की टंकी पीठ पर लटका रखी थी और हाथ
से बंदक जैसी पिचकारी पकड़ रखी थी। पिंकी भी अपनी पिचकारी निकाल कर ले आई, जो मम्मी ने उसे बाजार से दिलाई थी।

सारे बच्चे होली की मस्ती में डूब गए। सब एक-दूसरे को रंग लगाने में मशगूल हो गए पिंकी के ग्रुप में पारुल, श्याम और हर्ष था। आरव के ग्रुप में वैष्णवी और आध्या थे। दोनों टोलियां एक-दूसरे पर रंग बरसा रही थी। आरव अपने घर से गुब्बारों में रंग भरकर लाया था। उसने रंग भरा गुब्बारा हर्ष को मारा। इस पर हर्ष जोर से रोने लगा। 

तभी शर्मा अंकल उधर से गुजर रहे थे। उन्होंने हर्ष को चुप कराया और आरव को समझाया, 'बेटा, गुब्बारा मारने से तो दूसरों को चोट लग जाती है। होली तो प्यार से खेली जाती है, किसी को रुलाकर नहीं।' अंकल की बात सुनकर आरव ने हर्ष से माफी मांगी और बचे हुए सारे गुब्बारे फोड़ दिए।

इसके बाद सबने मिलजुल कर प्रेम से होली खेली। कुछ देर दोस्तों के साथ रंग खेलकर पिंकी घर आ गई। अब तक सुबह के दस बजे चुके थे। जब पिंकी घर पहुंची तो देखा सामने कुर्सी पर पापा बैठे हैं, अपने बैग से नए कपड़े और खिलौने निकाल रहे हैं। पिंकी खुशी से उछलते हुई चिल्ला उठी, 'पापा-पापा..!' मम्मी और बंटी भी वही बगल में खड़े थे।

मम्मी ने पिंकी की ओर मुस्कुराते हुए देखा और बोलीं, 'लो पिंकी आखिर तुम्हारे पापा आ गए न।' पिंकी झट से कूदकर पापा की गोद में बैठ गई। पापा काफी देर तक पिंकी के बाल प्यार से सहलाते रहे। पिंकी उनकी गोद से उतरी तो पापा ने बैग से निकाल कर एक सुंदर पिचकारी उसके हाथों में रख दी। पिंकी ने पापा को बैंक यू कहा तो पापा ने भी उसे मुस्कुराते हुए वेलकम कह दिया।

पिंकी बोली, 'पापा, आपने अचानक आकर मुझे सरप्राइज कर दिया।' पापा बोले, 'कैसा लगा सरप्राइज?' 'बहुत बढ़िया..।' पिंकी चहक उठी। 'मम्मा मैं अपने दोस्तों को पिचकारी दिखाने जाऊं?' पिंकी ने मासूमियत से पछा। 'हो... हां...जरूर दिखा आ..।' मम्मी हंसते हुए बोलीं। पिंकी दोबारा ग्राउंड में पहुंची।

सबने उसकी पिचकारी कौतूहल से देखी। नीले रंग की डॉल्फिन के आकार वाली पिचकारी बहुत ही सुंदर लग रही थी। अब पिंकी ने अपनी नई पिचकारी से अपने दोस्तों पर खूब रंग डाला। सारे दोस्तों ने उसकी पिचकारी की तारीफ की। पिंकी मन ही मन खूब खुश हुई।

शाम को सारे बच्चे पिंकी के घर गुझिया, पापड़ खाने पहुंचे। पिंकी ने सबको गुझिया, पापड़, नमकपारे परोसे। तभी मम्मी हाथ में एक डिब्बा लिए कमरे में आकर बोलीं, 'बच्चों, पिंकी के पापा तुम सब के लिए होली की मिठाई भी लाए हैं। इसे भी खाओ।' सब ने मिठाई खाई। 'आंटी यह तो बहुत टेस्टी है।' पारुल ने कहा। 'हां, हां आंटी..।'आरव बोल पडा। 

उधर से वैष्णवी बोली, 'आंटी मुझे एक और देना।' इस पर सब खिलखिला कर हंस पड़े। मम्मी पूरा डिब्बा वहीं रखते हुए बोलीं, 'हां.. हां.. यह लो जितनी मर्जी उतनी खाओ।' सब ने खूब मिठाई खाई। पापड, गझिया भी खाया और देर तक होली की बधाइयां एक-दूसरे को देते रहे। पिंकी को खूब मजा आया।*

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