स्कूल का पहला दिन best inspirational story in Hindi [motivblog]

Hindi kahani- स्कूल का पहला दिन 

 

best inspirational story in Hindi for kids and all peoples 

यह कहानी है सूरज की, जो अपने माता पिता के साथ एक नए शहर में रहता था। और उसे नए स्कूल में जाना था। वह नाश्ता कर ही रहा था कि तभी, बाहर स्कूल बस हॉर्न बजाती है। वह अपना स्कूल बैग पीठ पर टांगता है और अपने माता-पिता को बाय करते हुए घर के बाहर खड़ी स्कूल बस में चढ़ता है। 

और स्कूल बह चल पड़ती है। वह देखता है कि आगे की एक सीट खाली है वो उसी पर बैठ जाता है। तभी पीछे वाली सीट पर बैठा हुआ राहुल कहता है "देखो इधर मत बैठो पीछे आ जाओ" सूरज राहुल को देखता है और सोचते हुए राहुल के पास बैठने चला जाता है।

राहुल कहता है, तुम्हें पहले तो नहीं देखा इस बस में, सूरज कहता है, हां आज मेरा पहला दिन है स्कूल में, "तुमने मुझे वहां बैठने से मना क्यों किया अभी"
"आज तुम्हारा पहला दिन है ना अभी समझ जाओगे" "सूरज सोचने लगता है, तभी स्कूल बस रुकती है। और उसमें राजेश चढ़ता है। 

तब राजेश उसी सीट पर बैठता है जहां पहले सूरज बैठा था। राजेश के बस में आते ही सभी बच्चे घबरा जाते हैं। सूरज सभी बच्चों को घबराए हुए देख रहा था। राजेश आगे की सीट पर बैठे दोनों बच्चों को डराते हुए पूछता है।

"क्यों रे" कैसे हो तुम दोनों, बच्चे डरते हुए कहते हैं 'ठीक है राजेश भाई' आप कैसी हो ? राजेश एक बच्चे की गाल खींचते हुए कहता है 'बढ़िया रे, " बच्चा चिल्लाता है आ आ आ" यह सब पीछे बैठे बच्चे और दोनों देख रहे होते हैं तभी राहुल, सूरज के कान में कहता है। 

इसलिए मना किया था मैंने, वहां बैठने के लिए। "थैंक यू दोस्त थैंक यू" तुम ने बचा लिया। नहीं तो आज पहला दिन ही आखरी दिन हो जाता। तभी राजेश दूसरे बच्चे से कहता है, "चल रे थोड़ा बाजू को दबा दे" वह बच्चा राजेश की बाजू को दबाने लगता है। सूरज राहुल से कहता है। अगर वह सबको इतना तंग करता है 

तो टीचर से उसकी शिकायत क्यों नहीं करते। इस पर राहुल कहता है, शिकायत की थी पर शिकायत इसके ऊपर कुछ असर नहीं किया और जिस ने शिकायत की थी उसने इससे तंग आकर मजबूरन स्कूल छोड़कर जाना पड़ा। सूरज खुद से कहता है हुं हुं.....।

लगता है, कुछ ज्यादा बिगड़ गया है। सूरज क्लास में पढ़ कर दोपहर की छुट्टी के बाद स्कूल बस मैं सोचते हुए घर पहुंचता है। उसकी मां उसे कहती है "आ गए बेटे" चल कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूं। मां टेबल पर खाना रखती है। 

तभी वह वहां आता है और कुर्सी पर बैठकर राजेश के बारे में सोचने लगता है। मां उसे सोचते हुए देखती है और पूछती है। तो कैसा रहा आज का दिन, दोस्त दोस्त बने या नहीं, वह कहता है "अच्छा" दोस्त तो बने पर एक रह गया है। मां उसे परेशान देखते हुए पूछती है। 

"मतलब, ! क्या बात है ! मुझसे कहो मैं भी तुम्हारी दोस्त हूं ना। सूरज मां को देखता है और फिर स्कूल बस में जो हुआ वह सब बता देता है। मां सब समझने के बाद कहती है। जैसे कि तुमने मुझे यह बात दोस्त होने के नाते बताई है, तो मैं भी दोस्त की तरह ही तुम्हें सुझाव दूंगी। वह सूरज को समझाने लगती है 

और मां फिर बाहर से दो छड़ी लाती है फिर बड़ी आसानी से पहले एक छड़ी को तोड़ती है और फिर दूसरी छड़ी को।सूरज की समझ में कुछ नहीं आ रहा था, फिर माँ उन चारों छड़ी को एक साथ तोड़ने की भरपूर कोशिश करती है।

पर वह चारों छड़ियां एक साथ इतनी मजबूत हो जाती है कि टूटती ही नहीं है। थक हार कर वह उन छडियों को टेबल पर रख देती है। सूरज समझ जाता है वह खुश होकर अपनी मां के गले लग जाता है और कहता है। "मैं समझ गया मां" और अगले दिन सुबह सभी बच्चे स्कूल बस में बैठे हुए होता है, 

तभी बस रुकती है और राजेश उस बस में चढ़ता है। और देखता है कि उसकी सीट पर राहुल बैठा हुआ है। राजेश उसे कहता है "क्यों रे" तुझे पता नहीं इस सीट पर मैं बैठता हूं। राहुल कहता है, पता है पर आज मैं बैठूंगा इस पर। राजेश कहता है, लगता है तू ऐसी नहीं मानेगा। राजेश राहुल को मारता रहता है तभी सूरज कहता है। 

खबरदार जो राहुल को हाथ लगाया। राजेश गुस्से में कहता है तो तू मुझे रोकेगा। तभी बस के सभी बच्चे खड़े हो जाते हैं और कहते हैं। नहीं हम रोकेंगे, नहीं हम सब रोकेंगे, नहीं हम सब रोकेंगे। 

राजेश सभी बच्चों को एक साथ खड़े देखता है तो डर जाता है और कहता है। तो कोई बात नहीं यह बैठ जाऐ यहाँ पर। मैं पीछे बैठ जाता हूं, सभी बच्चे राजेश को डरा हुआ देखकर अपनी एकता पर खुश होते हैं। सूरज और राहुल सभी बच्चों को खुश देख कर मुस्कुराते हैं।


शिक्षा-  एकता में शक्ति होती है एकजुट होकर हम बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

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