Hindi kahani- सेल्फी, best interesting story in hindi

Hindi kahani- सेल्फी,  best interesting story in hindi .


लीला देवी के लिए जो पुराने साथी जैसी विरासत थी, बहू मालती के लिए महज़ बेकार वस्तुएं । पोता बहू ने उनको नए मायने देकर, विरासत को सजीला बना दिया।

सेल्फी से में कभी होतीं, तो कभी अपनी पुश्तैनी आराम कुर्सी पर बैठ जातीं। बहू मालती ने कहा भी, 'मांजी, आराम तो कर लो।' पर सास सुनने को तैयार नहीं थीं।

गांव की खेती, घर बेचकर बुजुर्ग लीला देवी शहर में बेटा-बहू के पास आ गई थीं। अपने पुरखों की निशानी के रूप में ये कुर्सी और पीतल- ताम्बे के बर्तन ले आई थीं।

बर्तन क्या थे, नक्काशीदार गढ़न का सुंदर नमूना थे। आज ऐसा काम ढूंढने से भी नहीं मिलेगा। बर्तन एक कमरे में बंद हो गए क्योंकि शहरों में इनका प्रचलन नहीं था। मालती कहती, 'मांजी, इनको बेच देते हैं। काम तो आते नहीं, बस साफ़-सफाई करवाते रहो।' पर उन्होंने हामी नहीं भरी। 

आराम कुर्सी पर पसरते हुए लीला देवी ने अपने पल्लू से चश्मा साफ़ किया और पुरानी यादों में खो गई। ये बर्तन नहीं है उनके जीवन यात्रा के सहचर हैं। अब पोते का ब्याह हुआ तो नए जमाने की लड़की रोमी, बहू बनकर आई। 

एक दिन रोमी ने देखा कि उसकी सास और दादी सास, पुराने बर्तनों की सफ़ाई करवा रहे हैं।

'ओ .. माई गॉड..! कितने सुंदर-सुंदर पॉट हैं। ये ख़जाना किसका है?' आश्चर्य से वह चीख ही पड़ी।

'अपने ही पुराने घर का सामान है' मालती ने बताया।
'आजकल इनका फ़ैशन है, आप इनको अंदर बंद करके
क्यों रखते हो?' बोलती हुई उसने सबको हाथ लगा लगाकर देखा। लीला देवी की आंखों में चमक आ गई।

बस..! उसने सब बर्तनों को पॉलिश करवा दिया और हॉल में कांच की अलमारी में रखवा दिए।
'वाह..! आप दोनों तो बिल्कुल रेडी हैं' कहती हुई रोमी
अपने बालों को हाथ से संवारते हुए फोन से फोटो लेने लगी। तीन पीढ़ियों की, पुरखों की अमानत के साथ सेल्फी ले रही थी नई बहू।

'दादी..मम्मी..! फोन की ओर देखो।! अरे.. मुस्कुराओ
भी। ये सेल्फी एंटीक बर्तनों के साथ मैं अपने दोस्तों को शेयर करुंगी' उसने कई फोटो निकाली। लीला देवी ने कनखियों से देखा, अलमारी में रखे उसके अपने साथी भी मुस्कुरा रहे थे।

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