हिन्दी लघुकथा :- शर्मसार best inspirational story in hindi

हिन्दी लघुकथा :- शर्मसार best inspirational story in hindi

हिन्दी लघुकथा :- शर्मसार best inspirational story in hindi
Hindi kahani 

सुनो जी, आपकी मां अपने कमरे के बाहर घूमती रहती है। लगता है वो दरवाजे पर कान लगाकर हमारी बातें सुनती रहती है। ये अच्छी बात नहीं है।' 'तुम दावे के साथ कैसे कह सकती हो कि मेरी मां ऐसा करती है।"

अभय ने आक्रोशित होकर पूछा तो अवि सफाई देते हुए कहने लगी-आपको अगर मेरी बात पर यकीन न हो तो, आप कुछ देर बाद खुद ही देख लेना, दरवाजे के नीचे से आती हुई रोशनी में आपको उनकी परछाई दिखेगी।' कुछ देर बाद अवि ने अभय को इशारा किया। 

अभय ने देखा तो उसे वाकई एक परछाई नजर आई। अब उसे अवि की बात पर यकीन हो गया था। उसने अवि से कहा- 'तुम सच कह रही थीं। अभी सो जाओ, मैं कल सुबह मां से इस बारे में बात करूंगा।

अभय को रात-भर नींद नहीं सुबह होते ही उसने दरवाजा खोला तो अवाक रह गया क्योंकि मां दरवाजे पर अपना सिर हूँ।टिकाए हुए सो रही थी। उसने आवेशित होकर से कहा- लगता है रातभर दरवाजे पर कान राहत लगाए, तुम्हारी नींद लग गई। 

आखिर तुम क्या चाहती हो मा। बुढ़ापे में तुम्हारी ऐसी हरकतें की देख-सुनकर मुझे शर्म आती है।' वह गुस्से में भी लाल हो लगातार बोले जा रहा था। मां उसके आरोपों को सुनकर हैरान थी। उसने कांपते स्वर में कहा -'बेटा तू जो समझ रहा है, ऐसा कुछ नहीं है। 

मैं तो प्रभु भजन में अपना बुढ़ापा करट रही हूं। तुम लोगों की बातें भला मैं क्यों सुनूंगी। अवि भी उनकी बातें सुनकर जाग चुकी थी। उसने तुनककर कहा- 'ओह, तो रातभर दरवाजे के पास बैठकर प्रभुभजन करती हो।' मां अपने ऊपर लगाये जा रहे आरोप से आहत हो बोली- 'बेटा, मेरे कमरे का पंखा आई। खराब पड़ा है। 

रात में गरमी की वजह हाल बेहाल हो जाता है। पसीने में तरबतर हो जाती इधर तुम्हारे कमरे में चल रहे एसी की हवा यहां कुछ ठंडक सी महसूस होती है तो कुछ मिलती है और दो घड़ी चैन की नींद आ जाती है। बस इसीलिए इधर बैठ जाती हूं।' मा बात सुनकर अभय शर्मसार हो गया। अवि खामोश हो उसका मुंह ताकने लगी।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां