Hindi kahani- मंझले सुकल की अंग्रेजी best interesting story in Hindi. very entertainment story in Hindi

Hindi kahani- मंझले सुकल की अंग्रेजी 

best interesting story in Hindi. very entertainment story in Hindi.

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यह उस समय की बात है, जब छोटे शहरों, कस्बों में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव आतंक की हद तक हुआ करता था। बहुत कम लोगों को अंग्रेजी आती थी। अंग्रेजी बोलने वाले समाज में विशेष समझे जाते थे। 

परिणामस्वरूप अंग्रेजी का ज्ञान कछ लोगों पर रिएक्शन' कर जाता था, जिससे वे सरक जाते और अपनी इस सटकी हुई अवस्था में शहर के हर गली चौराहे पर चाय, पान वालों से लेकर सड़क चलते हुए सामान्य आदमी को भी अपनी अंग्रेजी से टुचयाते रहते।

तो हमारे शहर के 'मंझले सकल' (शक्ल) जो पढ़ लिखकर पोस्टमास्टर के पद पर प्रतिष्ठित हो गए थे, उनको भी अंग्रेजी बहुत बुरी तरह से 'रिएक्ट' कर गई थी। वे अपनी अंग्रेजी के लट्ठ को चाहे जहां अंधाधुंध घुमाते। इससे मंझले के सम्पर्क में आने वाला हर व्यक्ति हीनता, दीनता के भाव से भरा हुआ कुंठित हतोत्साहित, लुटा-पिटा सा महसूस करता।

लेकिन शहर के बच्चों के लिए मंझले एक खिलौना हो गए थे। वे जब भी मंझले को देखते, वैसे ही जोर से चिल्लाते 'ए बी सी डी एक्स वाई जेड, मंझले हो गए पूरे मेडा। 

बच्चों की इस हरकत से मंझले अंग्रेजी भूलकर हिंदी में गालियां बरसाने लगते और प्रतिउत्तर में बच्चों को चिढ़ाते हुए चीखते 'क ख ग घा इंगा, तुमाए बाप छिंगा....भागो सारे नई तो खोपड़ा फोड़ देंगे।'

तो मंझले का आतंक इतना बढ़ गया था कि लोग तो लोग, शवयात्राएं भी उनको देखकर अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर हो जाती थीं। एक वाकया जिसका उल्लेख मंझले के व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए करना बेहत जरूरी है। हुआ यू कि हमारे शहर के वयोवृद्ध नागरिक सुुंदर सेठ का देहावसान हो गया। 

राम नाम सत्य है की ध्वनि के साथ उनकी शवयात्रा मुक्तिधाम की ओर बढ़ रही थी। मुक्तिधाम का मार्ग मंझले के घर से लगा हुआ था। शवयात्रा जैसे ही मंझले के घर के पास पहंची, राम नाम सत्य है, सत्य बोलो मुक्ति है सुनकर मंझले का दिमाग भन्ना गया। 

"वे चिल्लाकर बोले- होल्ड ऑन। 

कीप धिस डैडबॉडी डाउन। 

मे आई आस्क यू. हू इज राम? 

वाई आर यू पीपल चैंटिग हिज नेम? 

हाउ विल ही मेक यू मी? 

धा पर्सन हू डाइड इज सुंदर सेठ, 

हू वाज अ फ़ेमस लायर।  

ही नेवर स्पोक सत्य इन हिज होल लाइफ, 

नाट ही इज अ डैड पर्सन, 

ही इज नॉट एबल टू स्पीक अ सिंगल वर्ड.. 

हाठ ही विल स्पीक राम? 

इट मीन्स ही इज नॉट गोइंग टू बी फ्री?"

उनके प्रश्न को सुनकर मिडिल स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाले गुरु गुहन गुस्से से बोले- 

शटाप मंझले.. 

राम वाज अ सन ऑफ़ महाराजा दशरथ फ्रॉम अयोध्या। 

ही वाज अ गॉड। 

ही इज रेस्पॉन्सिबल फ़ॉर एवरी बर्थ।

मंझले गुड्डन पर चढ़ गए- 

मिस्टर गुड्डन हैव यू एवर सीन राम?

गुड्डन गुरु बोले- नो आई एम नॉट, बट तुलसीदास जी मेट हिम, 

ही हैज रिटन इन रामचरित मानस। 

डू यू नो हू तुलसीदास? 

यू फूल पोस्ट मास्टर.. 

मूव फ्रॉम हीयर वी आर गेटिंग लेट, 

वी हैव टू बर्न सुंदर सेठ.. 

सो ही रीच स्वर्ग ऑन टाइम, 

यमदूत्स आर वेटिंग फ़ॉर हिम इन मुक्तिधाम।

मंझले ने गुस्से में गुड्डन की कॉलर पकड़ ली- 

यू स्कूल मास्टर, आई विल नॉट अलाउ, 

यू टू पास धिस डैडबॉडी फ्रॉम धिस रोड। 

इफ यू वॉन्ट टू बर्न धिस लायर, 

धेन फ़ाइंड अधर वे टू रीच मुक्तिधाम, 

यू ब्लडी स्मॉल टीचर। 

आई एम नॉट अ फूल। 

आई नो तुलसीदास, तुलसी वाज अ पोयट डुरिंग धा टाइम ऑफ़ अकबर.. अकबर वाज 

अ सन ऑफ़ हुमायूं, 

अकबर सी हुमायूं एंड गिव स्माइल.. 

हुमायूं वाज ओल्ड, एंड ओल्ड मीन्स? 

ओल्ड मोंक, नॉट लिकर.. मोंक मीन्स अभिक्षु। 

भिक्षु हू नॉट आस्क भिक्षा, गिव ज्ञान। 

ज्ञान वाज माई क्लासमेट, 

पीपल गो स्कूल टू रिसीव ज्ञान, 

आई वाज गोइंग स्कूल विध ज्ञान।

माई प्रिंसिपल टोल्ड मी- कमिंग स्कूल विध ज्ञान इज्ज वेस्टिंग योर टाइम, 

बीकाज टाइम इज मनी एंड मनी इज्ज हनी, 

हनी इज वेरी गुड विध सितोपलादी चूर्ण, 

सितोपलादी चूर्ण क्युर खांसी, 

खांसी इज आ साइन ऑफ़ रोग, 

सो मेनी रोग बट धा मोस्ट डेंजरस रोग इज अ प्रेम रोग।

प्रेमरोग मेड बाई राजकपूर, 

राजकपूर वाज अ सन ऑफ़ पृथ्वीराज कपूर 

हू प्लेड अकबर, रिमेम्बर अकबर? 

हू सी हुमायूं एंड गेव स्माइल इन धा बिगनिंग ऑफ़ माई स्पीच। 

गो बैक .. आई विल नॉट अलाउ टू पास धिस डैडबॉडी फ्रॉम माई होली एरीआ। 

यू ब्लडी मिडल स्कूल टीचर, 

टॉकिंग टू अ पोस्टमास्टर इन इंग्लिश? 

फ़र्स्ट यू लर्न प्रॉपर इंग्लिश एंड कम टू मी। 

आई से गोऽऽऽ बैकऽऽ.. अधर्वायज आई विल डू हंगरी स्ट्राइक एंड फ़िनिश माय सेल्फ।

मंझले के मुंह से धाराप्रवाह अंग्रेजी सुनकर शवयात्रा में चल रहे लोग सन्न हो गए और उनको सुंदर सेठ की शवयात्रा का मुंह मोडकर मक्तिधाम पहंचने के लिए एक किलोमीटर लम्बा रास्ता लेना पड़ा। मझले का सरकना हमारे छोटे से शहर के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया था। 

उसी दिन बड्डे शुक्ल की अध्यक्षता में पंचायत बैठी, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि क्यों ना इनको आगरा के पागलखाने में एडमिट करवा दिया जाए, जहां के झटके इनको दुरुस्त कर देंगे और शहर भी इनके आए दिन के फटके से बच जाएगा।

सो मंझले के बड़े भाई 'बड्डे शुक्ल', मंझले से छोटे 'गंजले शुक्ल' और सबसे छोटे 'नन्हे शुक्ल', के साथ उनके पड़ोसी मंटू नगाईच जिन्होंने यह आगरा ले जाने वाला सुझाव दिया था तथा उनके बालसखा भोला बिचपुरिया तड़के की रेल से उनको लेकर आगरा की ओर कूच कर गए।

तीन दिन बाद मंझले शुक्ल का ‘क ख ग घा इंगा, तुमाए बाप छिंगा।' का मशहूर नारा शहर के हर गली कूचे में फिर से सुनाई देने लगा। मंझले वापस लौट आए थे। शहर में चिंता हो गई कि शायद आगरा मंझले शुक्ल को फ़तह करने में नाकामयाब रहा।

बड्डे शुक्ल और उनकी उस मंडली को ढूंढा गया जो मंझले सुकल को लेकर आगरा गए थे, तो पता चला के वे पांचों आदमी गायब हैं। भोला बिछपुरिया और मंटू नागाईच के यहां दुःख का साम्राज्य था। उनके परिजनों ने उन्हें मरा मान लिया था और मुंडन करवा के उनके पिंडदान और तेरहवीं की तैयारियां शुरू कर दी थी, 

क्योंकि मंझले शुक्ल ने उन दोनों के पुराने कपड़े, सुपाड़ी, सरोतिया, जनेऊ, गमछा उनके परिवार को वापस करते हुए ये जानकारी दी थी कि भोला और मंटू दोनों ने अपने परिवार से त्रस्त होकर यमुना जी में डूबकर अपने प्राण त्याग दिए हैं। 

चूंकि बड्डे शुक्ल ब्राह्मण हैं और ऊपर से उन दोनों के दोस्त भी हैं, इसलिए वे वहीं रुक गए ताकि मृत्यु के बाद किए जाने वाले सभी कर्मों को सम्पन्न कर सकें, जिससे उनकी आत्मा को भूत बनकर भटकना ना पड़े।

क़रीब सात दिन बाद हमारे घर के टेलीफ़ोन पर घंटी बजी। भैया ने फ़ोन उठाया तो पता चला कि बड्डे शक्ल हैं जो आगरा के मानसिक चिकित्सालय से बोल रहे हैं, जिनको उनके चार अन्य साथियों के साथ मंझले शुक्ल ने अपनी फ़र्राटेदार अंग्रेजी में बोलकर डॉक्टर के सामने सिद्ध कर दिया कि वे बड़ी मुश्किल से इन पांचों पागलों को अपने साथ लेकर आए हैं। ये बेहद हिंसक हैं किंतु बातचीत करने पर आपको सामान्य दिखाई देते हैं। 

आपके पूछने पर ये स्वयं को ठीक और दूसरे को पागल कहते हैं। आप इनसे पूछकर देखिए कि क्यों भाई क्या समस्या है तो ये पांचों ही आपसे कहेंगे कि डॉक्टर साहब ये आदमी पागल है, इसका इलाज कीजिए। इनको अंग्रेजी समझ में नहीं आती इसलिए मैं आपसे अंग्रेजी में बोल रहा हूं। 

आप चुपचाप इन पांचों को जमा कर लीजिए और बिजली के झटके से इनको ठीक कीजिए क्योंकि मैंने देखा है कि एक बार दिवाली में इनको ग़लती से बिजली का करंट लग गया था तो ये क़रीब पंद्रह दिनों तक बिलकुल ठीक रहे थे।

बड्डे शुक्ल घबराए हुए से बोल रहे थे- भैया हम पांचों को पिछले सात दिनों से करंट दिया जा रहा है। आज बड़ी मुश्किल से डॉक्टर साब को सहमत किया कि हम लोगों के ठीक होने के सबूत के तौर पर वे आपसे बात करना चाहते हैं, आप इनको बता दो कि हमलोग पागल नहीं हैं, असली पागल वो है जो अंग्रेजी बोलकर हमें पागल सिद्ध करके अपने शहर में घूम रहा है।

दो दिन बाद पांचों पंच लौट के शहर आए, किंतु बड़े भारी परिवर्तन के साथ। अब वे हर आदमी को
देख के चिंहुक जाते थे। थोड़ी-सी भी बिजली की स्पार्किंग देखकर दौड़ लगा देते। किसी को अंग्रेजी में बोलता देख वहां से तुरंत गायब हो जाते। एक और अजीब बात जो उन्होंने की। उन्होंने अपनी सरकारी
बिजली का कनेक्शन लिखित रूप से पर्मानेंटली कटवा दिया। उनका घर अब लालटेन और ढिबरियों की रोशनी से प्रकाशित होता था।

इस घटना के बाद हमारे शहर के प्रत्येक बच्चे को मार-पीट कर अंग्रेजी सिखाई जाने लगी क्योंकि बुजुर्गों के मन में यह बात बुरी तरह बैठ गई थी कि यदि आप अंग्रेजी बोलना जानते हैं, तब पागल होने के बाद भी आपको ज्ञानी और सामान्य व्यक्ति माना जाएगा और यदि आप सिर्फ हिंदी बोलते हैं तब ज्ञानी होने के बाद भी आपको पागल सिद्ध किया जा सकता है।

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